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चुनाव के समय दाखिल किये गये शपथपत्र की प्रति

 

किसानों को नवीन तकनीकी के माध्यम से आमदनी को दोगुना किया जाये

कोटा,   ग्राम आयोजन का उद्देश्य हाडौती के सिंचित क्षेत्र में होने वाली ऊपज की विपणन एवं प्रोसेसिंग के लिए निवेशकों को आकर्षित कर किसानों को नवीन तकनीकी के माध्यम से आमदनी को दोगुना किया जाये। ग्राम में होने वाले प्रदर्शन सजीव एवं किसानों को आत्मदर्शन कराने वाले हों जिससे कृषि, बागवानी एवं पशुपालन में की उन्नत तकनीकी की जानकारी मिल सके।  यह विचार कृषि, पशुपालन मंत्री एवं कोटा जिला प्रभारी मंत्री श्री प्रभुलाल सैनी ने सोमवार को कोटा के टैगोर सभागार में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट की तैयारियों की समीक्षा करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि ग्राम आयोजन के द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकी, उन्नत कृषि यंत्र एवं पशुपालन के बारे में जागरूकता लाकर हाडौती संभाग को राज्य में अग्रणी श्रेणी में लाना है। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण संभाग सिंचित होने के कारण लहसुन, धनियां जैसी मसाला फसलों, सोयाबीन, चावल, गेहूं जैसी ऊपज के कारण देश-प्रदेश में अपनी पहचान कायम किये हुए है। संतरा, क्यूनिआ के उत्पादन के लिए भी यहां अनुकूल वातावरण है। उन्होंने ग्राम आयोजन में स्थानीय ऊपज के विपणन एवं प्रोसेसिंग के लिए उद्यमियों को प्रेरित करने के निर्देश दिये। कृषि मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा ग्लोबल एग्रीटेक मीट के माध्यम से उन्नत कृषि के लिए संभाग की फसलों को ध्यान में रखकर जो वैरायटी इजाद की है उसकी जानकारी, मृदा या बीज में होने वाली बीमारियों से बचाव की तरीके, लहसुन, धनियां निर्यात के प्लान, पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम आदि की जानकारी दी जायेगी।  उन्होंने कहा कि ग्राम में आयोजित प्रदर्शनियों में बताये जाने वाले पौधों को वातावरण के अनुसार तैयार किया जाये जिससे स्वस्थ एवं हैल्दी दिखाई दे। उन्होंने कहा कि किसानों को ग्राम के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए वातानुकूलित व्यवस्थाएं की जाये। जाजम चौपाल में विषय विशेषज्ञों की बातचीत के बिन्दु भी तय किये जायें जिससे किसान सीधे रूबरू हो सकें। उन्होंने काश्तकारों को कृषि कार्य में काम आने वाले उपकरणों पर अनुदान की सुविधा भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।  प्रमुख शासन सचिव कृषि श्रीमती नीलकमल दरबारी ने बताया कि ग्राम में किसानों को अपने खेतों की मृदा परीक्षण,आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने, सोलर पम्प, मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन, आधुनिक मंडी, प्रोटेक्ट कल्टीवेंशन, डेयरी, बायोगैस प्लान, मधुमक्खी पालन आदि बिन्दुओं पर विस्तार से जानकारियां दी जायेगी।  ग्राम आयोजन में कोटा संभाग के 30 हजार पर््रगतिशील किसानों को आमंत्रित किया गया है। प्रदर्शनी में 45 कम्पनियां भाग लेंगे तथा एग्रो फोरेस्ट्री की 12 कम्पनियां आयेंगी। विभिन्न विषयों से संबंधित विशेषज्ञों से काश्तकारों को सीधे रूबरू होने एवं विभिन्न विषयों की जानकारी प्राप्त करने का भी अवसर मिलेगा। 
ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट आयोजन समीक्षा बैठक के बाद कृषि, पशुपालन मंत्री श्री प्रभु लाल सैनी, प्रमुख शासन सचिव कृषि श्रीमती नीलकमल दरबारी, संभागीय आयुक्त श्री रघुवीर सिंह मीणा, पुलिस महानिरीक्षक कोटा रेंज श्री विशाल बंसल, जिला कलक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर,फिक्की के प्रतिनिधियों के साथ रावतभाटा रोड शिवपुरा स्थित आएसी मैदान में प्रस्तावित आयोजन स्थल का निरीक्षण किया।  कृषि मंत्री ने ग्राम आयोजन में पहुंचने वाले काश्तकारों के रजिस्ट्रेशन काउन्टर, प्रदर्शनी स्थल, बैठक, भोजन, पेयजल, वाहन पार्किंग आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की तथा सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश प्रदान किये। उन्होंने निर्देश दिये कि आने वाले काश्तकारों को हर आवश्यक सुविधाएं मुहैया हो इस बात के प्रबंधों की माकूल व्यवस्था की जाये। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाली कम्पनियों के प्रतिनिधियों को ठहराने सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी समय रहते कर ली जाये। कृषि मंत्री श्री प्रभु लाल सैनी ने ग्राम आयोजन संबंधी स्टीकर का विधिवत विमोचन किया। उन्होंने ग्राम आयोजन के प्रचार-प्रसार के संबंध में आयोजित ऑटो रैली का हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया तथा स्वयं भी ऑटो में बैठकर रैली में भाग लिया। इस अवसर पर उनके साथ सांगोद विधायक श्री हीरा लाल नागर, यूआईटी अध्यक्ष श्री रामकुमार मेहता,प्रमुख शासन सचिव कृषि नीलकमल दरबारी, संभागीय आयुक्त रघुवीर सिंह मीणा, जिला कलक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर सहित अनेक अधिकारियों ने भी ऑटो में बैठकर रैली में भाग लिया।

 

कृषि सुधारों को लागू करने में राजस्थान देश का अग्रणी प्रदेश 

24 अप्रैल, 2017.जयपुर, सुचना एवं जनसपर्क विभाग की विग्यप्ति के अनुसार राजस्थान के कृषि मंत्री श्री प्रभू लाल सैनी ने कहा है कि राजस्थान कृषि सुधारों और नवाचारों को लागू करने तथा कृषि विपणन के क्षेत्र में देश काअग्रणीप्रदेश है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार कार्यक्रमों को हम सबसे पहले लागू कर चुके है, जिसकी प्रशंसा स्वयं भारत सरकार और नीति आयोग ने की है। श्री सैनी सोमवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कृषि विपणन मॉडल एक्ट-2017 पर चर्चा के लिए आयोजित राज्यों के कृषि मंत्रियों की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की पहल पर राजस्थान में उठाए गए क्रांतिकारी कदमों के कारण किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलवाने के लिए प्रभावी पहल की गई है। राज्य सरकार राजस्थान एकीकृत मंडी प्रबंधन सिस्टम के अंतर्गत एक देश-एक बाजार-एक किसान की अवधारणा को लागू करते हुए राज्य की 100 मंडियों को ई-टे्रडिंग पद्धति से जोड़ने जा रहे हैं। इस प्रकार का सिस्टम देश में सर्वप्रथम राजस्थान ने ही लागू किया है।   उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय कृषि बाजार कार्यक्रम के तहत प्रदेश की 25 मंडिया जुड़ चुकी है। राज्य में जहां उत्पादन, वहां विपणन नीति को लागू करते हुए 23 विशेष मार्केट बनाए गए हैं। राज्य में कृषि प्रसंस्करण एवं कृषि विपणन प्रोत्साहन नीति-2015 जारी की गई है। साथ ही प्रदेश में झालावाड़ में संतरा, टोंक में अमरूद और धौलपुर में आम के उत्कृष्टता केन्द्र स्थापित किए गए हैं। 

श्री सैनी ने बताया कि राजस्थान के लूणकरणसर (बीकानेर) में देश की पहली जैतून रिफाइनरी की स्थापना और देश का पहला स्वदेशी ऑलिव ऑयल ब्राण्ड राज ऑलिव तैयार कर उसका विपणन किया जा रहा है। इसके बाद हम बहुत शीघ्र ही एशिया में पहली बार जैतून (ओलिव) के पत्तो से निर्मित ग्रीन-टी (चाय) को लेकर भी आ रहे हैं। इसके लिए जयपुर के निकट बस्सी में संयत्र बनाया जा रहा है। यह चाय एंटी डायबिटिज और एंटी ऑक्सीडेंट होगी।  श्री सैनी ने सुझाव दिया कि विभिन्न फसलों की उत्पादन लागत मूल्य में कमी करने के प्रयास होने चाहिए। इससे किसानों को राहत एवं मदद मिल सकेगी।  उन्होंने कहा कि सन् 2022 तक किसानों की आमदानी दुगुनी करने का लक्ष्य केवल कृषि विपणन बलबूते के संभव नही है। वरन् फल-सब्जियों, टमाटर, आलू, लॉकी आदि को मंडियों में संरक्षण देने के साथ ही खाद-बीज जैसी जरूरी मदद देकर किसानों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। श्री सैनी ने सुझाव दिया कि संविदा-खेती के तहत उत्पादित कृषि उत्पादों की सरकारी खरीद की गारंटी देनी होगी। इसी प्रकार बाजार हस्तक्षेप योजना के अंतर्गत सरकार को बाजार में दखल देते हुए आलू-प्याज जैसे कृषि उत्पादों को बढ़े हुए बाजार भावों पर सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खरीदना चाहिए, ताकि किसानों को नुकसान नहीं होवे। उन्होंने सुझाव दिया कि फसलों का विविधिकरण करने की भी जरूरत है। विशेषकर राजस्थान जैसे प्रांत में बाजरा-मक्का जैसी फसलों मेें लागत अधिक आती है, जबकि बाजार में कम मूल्य मिलता है। ऎसी फसलों को खरीदने की गारंटी सुनिश्चित कर किसानों को क्षति से बचाया जा सकता है। ग्राम का सफल आयोजन श्री सैनी ने बताया कि किसानों को खेती के नए तरीकों और उन्नत वैश्विक तकनीक से रूबरू करवाने के लिए मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की पहल पर राज्य में पहली बार ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) का आयोजन किया गया। इसमें कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में लगभग 4 हजार 400 करोड़ रूपये के निवेश के 38 एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर हुए। इस सफल आयोजन में 58 हजार कृषकों ने भाग लिया। यह आयोजन अब राज्य में कोटा संभाग से शुरू कर हर मुख्यालय संभागवार आयोजित किए जाएंगे। बैठक में राजस्थान की प्रमुख कृषि सचिव श्रीमती नील कमल दरबारी भी मौजूद थी।
 विग्यप्ति के अनुसार नई दिल्ली में प्रवासी राजस्थानियों की संस्था राजस्थान अकादमी द्वारा इस वर्ष भी सुभाष लखोटिया श्रवण कुमार पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। यह पुरस्कार प्रति वर्ष माता-पिता के प्रति अतुल्य सेवा करने वाले पुत्र और पुत्री को दिया जाता है। पुरस्कार में एक लाख रुपये नगद और स्मृति चिन्ह शामिल है। संस्था के अध्यक्ष श्री गौरव गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष इस सम्मान पुरस्कार के लिए प्रविष्ठियां आमंत्रित करने की घोषणा की है।  उन्होंने बताया कि पात्र व्यक्ति 30 जून, 2017 तक अपना पूर्ण बायोडाटा पुरस्कार पाने की योग्यता के विवरण के साथ अध्यक्ष, राजस्थान अकादमी, 254-जागृति एंकलेव, दिल्ली 92 पर भेज सकते हैं। श्री गुप्ता ने बताया कि देश के जाने माने सी.ए रहे सुभाष लखोटिया के नाम से श्रवण कुमार पुरस्कार वर्ष 2015 से प्रतिवर्ष दिया जा रहा है। 

 

प्रति हेक्टेयर 20 क्विंटल सरसों के उत्पादन के लक्ष्य हासिल करेगा राजस्थान
 25 मार्च, 2017. कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी ने कहा कि राजस्थान में इस बार सरसों की बम्पर पैदावार हुई है और राज्य निर्धारित किए गए 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के बहुत करीब है। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले सरसों का उत्पादन 950 किलो प्रति हेक्टेयर था, जो इस वर्ष 1400 किलो प्रति हेक्टेयर हो गया है। इसी आधार पर अगर उत्पादन बढ़ता है, तो आगामी सीजन में 2000 किलो यानी 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर सरसों का उत्पादन हो जाएगा। उन्होंने राजस्थान में इस बार 44 लाख मैट्रिक टन सरसों उत्पादन की संभावना व्यक्त की। कृषि मंत्री डॉ. सैनी शनिवार को यहां एक निजी होटल में इंटरनेशन कन्सलटीव ग्रुप फॉर रिसर्च ऑन रेपसीड द्वारा आयोजित अन्तरराष्ट्रीय सेमीनार को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे सरसों की ऎसी परम्परागत किस्मों को विकसित करें, जिनमें तेल की मात्रा ज्यादा हो और वह विश्वस्तरीय हों। आज भारत जरूरत का महज 36 प्रतिशत खाद्यान्न तेल स्वयं उत्पादित कर रहा है और बाकी आयात किया जा रहा है। राजस्थान में उत्पादित होने वाली सरसों में तेल की मात्रा 40 से 42 प्रतिशत है, जिसे अच्छी किस्मों को प्रोत्साहन देकर बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।   डॉ. सैनी ने बताया सरसों के उत्पादन में कनाडा और चीन के बाद भारत का तीसरा स्थान है। राजस्थान देश में सबसे अधिक 48 प्रतिशत सरसों उत्पादित करते हुए पहले स्थान पर है।

सरकार सरसों आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने का पूरा प्रयास कर रही है। सरसों पर लगने वाले चूंगी कर को 1.5 प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत किया गया। हाल ही में सरकार द्वारा इसे नकारात्मक सूची से बाहर किया गया है, जिसके बाद राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना और राजस्थान कृषि प्रसंस्करण एवं प्रोत्साहन नीति-2015 के तहत मिलने वाले फायदे सरसों के प्रसस्ंरकण उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को मिल सकेंगे।   कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरसों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए जरूरी है कि सरसों की नई उत्पादन तकनीक और किस्में विकसित की जाएं। लेकिन उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए जेनेटिक मॉडीफाइड तकनीक को भी अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने वैज्ञानिकों से भी परम्परागत किस्मों पर ही अनुसंधान करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि हाल ही के कुछ वर्षों में प्रति व्यक्ति खाद्यान्न तेल का उपभोग बढ़ा है। वर्ष 2009-10 में जहां प्रति व्यक्ति प्रति साल 13.3 किलो खपत थी, जो बढ़कर वर्ष 2012-13 में 15.8 किलोग्राम हो गई है। डॉ. सैनी ने बताया कि साल दर साल खाद्यान्न तेल की बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखते हुए तिलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर देना होगा। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक, सरसों के प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमी और बड़ी संख्या में किसान व व्यापारी उपस्थित थे। 

 

 

कृषि मंत्री ने अंता में लहसुन भण्डारगृह का किया लोकार्पण 
 4 मार्च, 2017. कृषि मंत्री श्री प्रभुलाल सैनी ने कहा कि कृषक, कृषि के क्षेत्र में तकनीक व नवाचार के माध्यम से सर्वांगीण विकास करते हुए कम पानी, कम लागत व अधिक उत्पादन की संकल्पना को साकार कर सकते है।  श्री सैनी शनिवार को बारां जिले के अन्ता में कृषि विज्ञान केन्द्र में आयोजित कृषि विज्ञान मेले में लहसुन भण्डारगृह के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के नेतृत्व में प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में परम्परागत खेती के स्थान पर तकनीक व नवाचार के माध्यम से अधिक उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त किया गया है। राजस्थान प्रदेश को गेहूं की उत्पादकता के क्षेत्र में इसी कारण राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।  समारोह में कृषि मंत्री श्री प्रभुलाल सैनी व अतिथियों ने कृषि के क्षेत्र में नवाचार के माध्यम से फसल उत्पादकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित करने वाले कृषकों को प्रशस्ति प्रत्र व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया।  कृषि मंत्री श्री प्रभुलाल सैनी, राजस्थान वरिष्ठ नागरिक बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रेमनारायण गालव, जिला प्रमुख श्री नंदलाल सुमन व अतिथियों ने कृषि विज्ञान केन्द्र अन्ता में समारोह से पूर्व कृषकों के लिए बनाये गए कम लागत लहसुन भण्डार गृह का लोकार्पण कर उसका अवलोकन भी किया। इससे पूर्व अतिथियों ने कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रांगण में कृषकों को तकनीक व नवाचार, उन्नत कृषि की जानकारी देने वाली विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन भी किया। लहसुन प्रदर्शनी का भी अतिथियों द्वारा अवलोकन किया गया। 

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